हिंदी में जानिए की फाइनेंस क्या होता है? What is Finance in Hindi?

Finance क्या होता है

आपने कई बार ‘Finance’ शब्द को सुना होगा लेकिन शायद आपको इसका मतलब नहीं मालूम तभी तो आप इस पोस्ट पर आये हैं तो चलिए जानते हैं कि फाइनेंस क्या होता है?

वित्तीय प्रबंधन (Money Management) को ही ‘फाइनेंस’ कहते हैं। इसमें कंपनी अथवा व्यवसाय के अंतर्गत होने वाली आर्थिक क्रियाओं जैसे बचत, उधारी, देनदारी, प्लानिंग और निवेश संबंधी अन्य आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। फाइनेंस अपने आपमें एक बड़ा टॉपिक है, फिर भी हम इसे आसान भाषा मे समझने की कोशिश करते हैं। Finance, किसी व्यक्ति, कंपनी या फिर व्यवसाय के हिसाब-किताब को सुव्यवस्थित करने का तरीका है।

हम सब अपने दैनिक जीवन में पैसों की बचत करने, उधारी को चुकाने, बकाया लेने व पैसे को किसी काम मे लगाने में जो हिसाब-किताब या लेखा-जोखा रखते हैं असल मे वो भी एक प्रकार का फाइनेंस ही होता है। बड़ी कंपनियों, व्यवसायों और गवर्नमेंट के द्वारा पैसों का भारी मात्रा में लेन-देन होता है ऐसे में यहां भी आर्थिक प्रबंधन के लिए ‘फाइनेंस’ की मदद लेनी पड़ती है।

‘लोन’ और ‘फाइनेंस’ में क्या अंतर है?

Loan एक कैश, प्रॉपर्टीज और अन्य भौतिक वस्तुएं भी हो सकती है जो कि किसी दूसरी पार्टी को तय समय के भीतर और मूल-मूल्य और उसपर लगने वाले ब्याज के साथ पुनर्भुगतान जैसी शर्तों पर स्वीकृति के बाद दिया जाता है। जबकि फाइनेंस, cash management का विज्ञान है, जिसमे बचत, लोन, देनदारी, आर्थिक योजनाएं बनाना और निवेश जैसी अन्य बातों का अध्ययन किया जाता है। आप इसे इस तरह भी समझ सकते हैं कि Finance एक बुक है और Loan उसका एक पाठ/lesson।


‘फाइनेंस’ कितने प्रकार के होते हैं?

वर्तमान में फाइनेंस अर्थात वित्त तीन प्रकार के होते हैं:

  1. व्यक्तिगत वित्त ( Personal Finance)
  2. निगम वित्त (Corporate Finance)
  3. लोक वित्त (Pubilc Finance)

आइए फाइनेंस के इन तीनो प्रकारों को संक्षिप में जानते हैं:

व्यक्तिगत वित्त (Personal Finance): 

इसे निजी वित्त भी कहते हैं इसके अंतर्गत कोई व्यक्ति या परिवार अपने वर्तमान बजट को देखते हुए आगामी आर्थिक जोखिमो और आने वाले जीवन में पैसे की जरूरतों के अनुसार उसे इक्कठा करने से लेकर बचत और खर्च तक का फ्यूचर प्लान बनाता है जिससे उसे आने वाले समय मे पैसों की किल्लत का सामना न करना पड़े।

निगम वित्त (Corporate Finance): 

निगम वित्त को कॉर्पोरेट फाइनांस भी कहते हैं इसके अंतर्गत किसी कंपनी अथवा व्यापार में लगने वाले पैसों की निगरानी और प्रबंधन होता है।

लोक वित्त (Public Finance):

इसे पब्लिक फाइनांस भी कहते हैं इसके अंतर्गत सरकार के आय, व्यय और बचत का आकलन, निगरानी और प्रबंधन होता है।


‘Finance’ क्यों जरूरी है?

इसमें कोई शक नही की आज के समय में फाइनेंस अर्थात वित्त किसी व्यवसाय अथवा कंपनी के सबसे जरूरी पहलुओं में से एक है। भारी मात्रा में धनराशि, दैनिक नकदी प्रवाह और निरंतर लेन-देन में आर्थिक जोखिमों से बचने के लिए निगरानी और प्रबंधन बेहद जरूरी है। अनावश्यक खर्चो को रोकने और निवेश उद्देश्यों की पूर्ति के लिए फाइनेंस अर्थात वित्त बहुत कामगार साबित होता है। हमारे भारत देश में फाइनेंस जैसी बेहद जरुरी काम को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है जिसकी वजह से कहीं-कहीं परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु हो जाने पर पूरा परिवार टूट जाता है जबकि विदेशों में ऐसा नहीं होता, वहां लोग आर्थिक रूप से भी जागरूक हैं और अपने भविष्य के बारे में प्लानिंग करते हैं और Finance Experts से सलाह भी लेते हैं जिससे उन्हें आने वाले समय में हम भारतीयों की तुलना में कम कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।

भारत मे कई ऐसे बैंक और नॉन-बैंक फाइनेंसियल कंपनीज़ हैं जो कि फाइनेंस की सुविधा उपलब्ध कराते हैं जिनमे टॉप 10 ये हैं:

  1. बजाज फाइनेंस
  2. चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट & फाइनेंस
  3. एबिस कैश वर्ल्ड मनी इंडिया लिमिटेड
  4. हाउसिंग डेवलोपमेन्ट फाइनेंस कारपोरेशन (HDFC Ltd)
  5. एल&टी इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस
  6. एल आई सी हाउसिंग फाइनेंस
  7. महिंद्रा & महिंद्रा फाइनेंसियल सर्विसेज
  8. मुथूट फाइनेंस
  9. पावर फाइनेंस कारपोरेशन
  10. टाटा कैपिटल फाइनेंसियल सर्विसेज

उम्मीद करते हैं की आपको, फाइनेंस क्या है, लोन और फाइनेंस में अंतर, फाइनेंस कितने प्रकार के होते हैं, फाइनेंस क्यों जरुरी है, भारत की टॉप 10 फिनान्सिअल कंपनीज के नाम जैसे अन्य सवालों के जवाब मिल गए होंगे । यदि आपको हमारे ब्लॉग पर मौजूद किसी कंटेंट से किसी भी तरह की परेशानी है तो उसे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। धन्यवाद !


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